PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना: 2026 की पूरी गाइड
आख़िरी जाँच: 4 अक्टूबर 2026
PM सूर्य घर सब्सिडी की अवधि: 31 मार्च 2027
₹78,000 की केंद्रीय आवासीय सब्सिडी वित्त वर्ष 2026-27 के अंत (31 मार्च 2027) तक स्वीकृत है। इस तारीख़ से काफ़ी पहले आवेदन करें और सिस्टम चालू करवाएँ। अभी तक किसी विस्तार की आधिकारिक सूचना नहीं है; MNRE ने संकेत दिया है कि मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों का लक्ष्य पूरा न हो पाए, जिससे विस्तार संभव तो है पर पक्का नहीं — प्रकाशित तारीख़ के हिसाब से ही योजना बनाएँ।
अक्टूबर 2026 तक की स्थिति — वर्तमान जानकारी की पुष्टि pmsuryaghar.gov.in पर करें।
PM सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना भारत सरकार की आवासीय रूफटॉप सोलर योजना है, जो फरवरी 2024 में एक करोड़ घरों की छत पर सोलर लगाने के लक्ष्य से शुरू हुई। एक सामान्य 3 kW घरेलू सिस्टम पर केंद्र सरकार की सब्सिडी ₹78,000 है — यानी सिस्टम की लागत का बड़ा हिस्सा। इस गाइड में बताया गया है कि कौन पात्र है, कितनी सब्सिडी मिलती है, आवेदन के सही चरण क्या हैं, कितना समय लगता है और किन गलतियों से लोगों की सब्सिडी अटक जाती है। योजना 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत है; अक्टूबर 2026 तक किसी विस्तार की आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई है।
कितनी सब्सिडी मिलती है?
- 1 kW सिस्टम: ₹30,000
- 2 kW सिस्टम: ₹60,000
- 3 kW और उससे बड़ा सिस्टम: ₹78,000 (अधिकतम)
सब्सिडी प्रति kW एक तय राशि है — पहले 2 kW के हर kW पर ₹30,000 और तीसरे kW पर ₹18,000 — यह आपके कोटेशन का प्रतिशत नहीं है, इसलिए कोटेशन ज़्यादा होने से सब्सिडी नहीं बढ़ती। 3 kW से ऊपर की क्षमता पर केंद्र की कोई अतिरिक्त सब्सिडी नहीं मिलती। कई राज्य अपनी ओर से भी राशि जोड़ते हैं: जैसे उत्तर प्रदेश और दिल्ली आवासीय सिस्टम पर अधिकतम ₹30,000 तक अतिरिक्त देते हैं। अपने राज्य की जानकारी के लिए देखें: उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, या बाकी राज्यों के लिए राज्य-वार सब्सिडी पेज (अंग्रेज़ी)। अपनी कुल सब्सिडी निकालने के लिए सब्सिडी कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
कौन पात्र है?
- आप एक आवासीय परिवार हैं, जिसके पास अपना घर है और छत सोलर के लिए उपयुक्त है (छाया-मुक्त जगह, लगभग 80 वर्ग फ़ीट प्रति kW)
- आपके पास वैध घरेलू बिजली कनेक्शन है
- आपने पहले रूफटॉप सोलर की कोई सब्सिडी नहीं ली है
अगर छत आपके नाम नहीं है, तो आमतौर पर मालिक की सहमति चाहिए होती है। जिन फ्लैट मालिकों के पास छत पर अपना विशेष अधिकार नहीं है, उनके लिए आम तौर पर सोसाइटी-स्तर का सिस्टम बेहतर रहता है — देखें हाउसिंग सोसाइटी सोलर (अंग्रेज़ी)।
ज़रूरी दस्तावेज़
- आपका ताज़ा बिजली बिल (इसमें आपका उपभोक्ता नंबर, DISCOM और स्वीकृत भार — सैंक्शन्ड लोड — दिखता है)
- पहचान पत्र — पोर्टल आमतौर पर आधार माँगता है
- सब्सिडी की राशि के लिए बैंक खाते का विवरण (खाता संख्या, IFSC, रद्द किया हुआ चेक)
- छत के स्वामित्व का प्रमाण या मालिक की सहमति, जहाँ माँगी जाए
- बाद के चरण में: वेंडर का इनवॉइस, प्लांट का विवरण और नेट मीटर का आवेदन
ज़रूरतें राष्ट्रीय पोर्टल और आपकी DISCOM तय करती हैं और राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती हैं, इसलिए इसे एक चेकलिस्ट समझें, आधिकारिक सूची नहीं।
आवेदन के 5 चरण
- राष्ट्रीय पोर्टल पर पंजीकरण करें। pmsuryaghar.gov.in पर जाएँ, अपना राज्य और DISCOM चुनें, और अपने बिजली उपभोक्ता नंबर व मोबाइल नंबर से पंजीकरण करें।
- रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन करें। लॉगिन करके अपनी छत का विवरण और चाही गई क्षमता भरें।
- DISCOM से टेक्निकल फिजिबिलिटी (Technical Feasibility Approval) का इंतज़ार करें: आपकी बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) यह जांचती है कि आपके घर का स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) और इलाके का लोकल ट्रांसफार्मर इस सोलर क्षमता को संभालने में सक्षम है या नहीं।
- पंजीकृत वेंडर से इंस्टॉल करवाएँ। पोर्टल की पंजीकृत सूची से वेंडर चुनें, कोटेशन लिखित में तय करें और नीचे बताए DCR नियम के अनुसार मॉड्यूल के साथ प्लांट लगवाएँ।
- नेट मीटरिंग, जॉइंट इंस्पेक्शन और सब्सिडी क्रेडिट: प्लांट तैयार होने के बाद नेट मीटर के लिए अप्लाई करें। DISCOM के अधिकारी साइट इंस्पेक्शन कर नेट मीटर लगाएंगे। इसके बाद पोर्टल पर कमीशनिंग सर्टिफ़िकेट (Commissioning Certificate) जारी होगा। जैसे ही आप अपना बैंक विवरण (कैंसिल्ड चेक/पासबुक) पोर्टल पर सबमिट करेंगे, केंद्र की सब्सिडी सीधे आपके खाते में (DBT के ज़रिए) लगभग 30 दिनों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
कितना समय लगता है?
शुरू से अंत तक कुछ हफ़्तों से लेकर कुछ महीनों तक का समय मानकर चलें। व्यवहार्यता मंज़ूरी, इंस्टॉलेशन, नेट मीटर लगना और DISCOM का निरीक्षण — हर एक में समय लगता है, और व्यस्त समय में जब मंज़ूरियाँ और DCR मॉड्यूल की आपूर्ति एक साथ दबाव में आती है, तो देरी बढ़ जाती है। योजना की अवधि 31 मार्च 2027 को ख़त्म होती है, इसलिए आख़िरी तिमाही से काफ़ी पहले शुरू करना ही सुरक्षित तरीका है।
DCR नियम, जो तय करता है कि सब्सिडी मिलेगी या नहीं
सब्सिडी पाने के लिए DCR (Domestic Content Requirement) मॉड्यूल लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसका मतलब है कि सोलर पैनल के साथ-साथ उसके अंदर लगे सोलर सेल भी भारत में ही बने होने चाहिए, और वह मॉडल सरकार की ALMM (List-I) में शामिल होना चाहिए। कोटेशन फाइनल करने से पहले वेंडर से इनवॉइस और एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से "DCR Compliant" और मॉड्यूल का सही मॉडल नंबर लिखवाएं, साथ ही निर्माता का DCR सर्टिफ़िकेट ज़रूर मांगें। साइन करने से पहले: कोटेशन में मॉड्यूल का मॉडल नंबर और "DCR" शब्द लिखित में लें, उस मॉडल को ALMM की मौजूदा सूची में जाँचें, निर्माता से DCR घोषणा-पत्र माँगें, और इनवॉइस संभालकर रखें। पूरी जाँच-सूची के लिए देखें DCR बनाम नॉन-DCR पैनल (अंग्रेज़ी), और दोनों सूचियों को समझने के लिए ALMM List-I बनाम List-II (अंग्रेज़ी)।
बिना ज़्यादा पैसे दिए उपकरण और वेंडर कैसे चुनें
सब्सिडी तय है, इसलिए कोटेशन में जो भी एक्स्ट्रा रुपया जुड़ता है, वह आपकी जेब से जाता है। कोटेशन की तुलना कुल कीमत से नहीं, ₹ प्रति वाट के हिसाब से करें। दो कोटेशन में बड़े अंतर की वजह बनने वाली लाइन-आइटम समझने के लिए पढ़ें सोलर कोटेशन कैसे पढ़ें (अंग्रेज़ी), और धोखाधड़ी से बचने के लिए सोलर स्कैम हैंडबुक (अंग्रेज़ी)। किसी ख़ास उपकरण की डेटाशीट-स्तर की जानकारी के लिए हमारे सोलर पैनल रिव्यू और इन्वर्टर रिव्यू देखें (अंग्रेज़ी)।
दावे अटकने या रद्द होने के आम कारण
- गैर-DCR या ALMM सूची से बाहर के मॉड्यूल लगाना
- पोर्टल पर पंजीकृत न होने वाले वेंडर से इंस्टॉलेशन
- आवेदन में स्वीकृत क्षमता से अलग क्षमता लगाना
- बैंक विवरण का पोर्टल पर खाताधारक के नाम से मेल न खाना
- नेट मीटर और निरीक्षण के चरण छोड़ना या उनमें देरी
- पहले ही रूफटॉप सोलर की कोई दूसरी सब्सिडी ले चुके होना
लोन और फ़ाइनेंस
योजना रूफटॉप सोलर के लिए रियायती दरों पर बैंक लोन को भी बढ़ावा देती है। शर्तें बैंक के अनुसार अलग होती हैं और बदलती रहती हैं, इसलिए केवल विज्ञापित दर पर भरोसा करने के बजाय असली ऑफ़र की तुलना करें — और याद रखें कि सब्सिडी कमीशनिंग के बाद आती है, इसलिए पूरी लागत पहले आपको या आपके बैंक को लगानी होगी।
अंतिम तारीख़ और क्या बदल सकता है
योजना वित्त वर्ष 2026-27 यानी 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत है। 4 अक्टूबर 2026 तक हमें किसी आधिकारिक विस्तार की सूचना नहीं मिली; 15 सितंबर 2026 को MNRE के सचिव के हवाले से कहा गया कि मार्च 2027 तक एक करोड़ के लक्ष्य के मुक़ाबले लगभग 85–90 लाख घर पूरे होने की उम्मीद है, जिससे विस्तार संभव तो लगता है, पर पक्का नहीं। अपडेट के लिए हमारा डेडलाइन ब्रीफ़ (अंग्रेज़ी) देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सब्सिडी मुझे मिलती है या वेंडर को?
आपको। केंद्र की सब्सिडी कमीशनिंग के बाद सीधे उस बैंक खाते में आती है जो आपने पोर्टल पर दर्ज किया है।
क्या मुझे नेट मीटरिंग चाहिए?
हाँ — प्रक्रिया में नेट मीटर लगना और DISCOM का निरीक्षण शामिल है। भेजी गई यूनिटों का मूल्य राज्य के अनुसार अलग होता है; देखें राज्य-वार नेट मीटरिंग (अंग्रेज़ी)।
क्या राज्य की सब्सिडी भी मिल सकती है?
जहाँ आपका राज्य देता है, वहाँ हाँ — उसका दावा अलग से किया जाता है, आमतौर पर राज्य की एजेंसी या पोर्टल के ज़रिए। ऊपर दिए राज्य-वार पेज देखें।
हमने यह गाइड 4 अक्टूबर 2026 को आख़िरी बार जाँची थी। योजना के नियम, पोर्टल के चरण और राज्यों की सब्सिडी बदलती रहती हैं — आवेदन करने से पहले pmsuryaghar.gov.in पर वर्तमान प्रक्रिया की पुष्टि कर लें।
अपने घर की सब्सिडी निकालें
राज्य और सिस्टम का आकार चुनें — केंद्र + राज्य सब्सिडी, लागत और पेबैक तुरंत।
सब्सिडी कैलकुलेटर खोलेंकाम का लगा? किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जो सोलर लगवाने की सोच रहा है।